रूपकुंड झील के अनसुलझे रहस्य /roopkund jheel ke unsuljhe rehsya -

हमारा देश में आज भी कही ऐसे अनसुलझे रहस्य हैं जिनके बारे में अभी तक कोई नहीं जान पाया है
ऐसे ही एक अनसुलझा रहस्य है रूपकुंड झील का ।

रूपकुंड झील के अनसुलझे रहस्य /roopkund jheel ke unsuljhe rehsya - 

रूपकुंड झील उत्तराखंड के चमोली जिले के गोपेश्वरनाथ में स्तिथ है। बर्फीली चोटियां के बीच बसा ये इलाका प्राचीन काल से ही धार्मिक आस्थाओं का केंद्र रहा है। समुद्र तल से इसकी ऊंचाई  5000 मी0 है ।
इस झील को आम भाषा में कंकालों कि झील के नाम भी जाना जाता है ।
क्यूंकि इसके आस पास हज़ारों की संख्या में कंकाल तंत्र मिलते हैं ।
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roopkund jheel uttarakhand/roopkund jheel ke unsuljhe rehsya/  रूपकुंड झील का इतिहास

उत्तराखंड में इसके बारे में कहीं लोक कथाएं प्रचलित हैं -

1-ऐसा माना जाता है कि कैलाश जाते समय मां नंदा देवी को प्यास लगी थी उन्होंने इसके बारे में भगवान शिव को बताया भगवान शिव ने अपना त्रिशूल से उस जगह पे पानी उत्पन कर दिया था पानी पीते वक्त नंदा देवी ने उस कुंड में अपना चेहरा देखा तो उन्हें ये कुंड पसंद आ गया ।इसके बाद से ही इस कुंड को रूपकुंड के नाम से जाने जाना  लगा ।
उत्तराखंड के कहीं लोक गीतों और जागरों में भी इस रहस्य मय झील का  जिक्र किया गया है।यहा लोग नंदा देवी की पूजा अर्चना करते हैं
 

रूपकुंड झील में कंकाल मिलने का रहस्य (roopkund jheel me kankal Milne ka rehsya)-

रूपकुंड झील में हजारों की संख्या में मानव कंकाल तंत्र पाए गए हैं । इन कंकालों को सबसे पहले 1942 में एक फॉरेस्ट गार्ड ने खोजा था ।
वैज्ञानिकों का मानना है कि इन लोगो की मौत किसी महामारी से हुई थी लेकिन ताजा जानकारियों से वैज्ञानिकों को पता चला कि ये कंकाल तंत्र 850 इस्बी0 में यहां आए स्थानीय लोगों के हैं।इसमें से कुछ कंकाल एक ही परिवार के सदस्यों के हैं । तथा  इन लोगो की मौत बर्फीले तूफान से हुई थी।  हर साल बर्फ पिघलने से ये नर कंकाल दिखाई देते हैं।


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