Jaiv vikash kya hai?/ jav vikas ke sidhant in hindi / जैव विकास क्या है ? / जैव विकास के सिद्धांत ?


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Jaiv vikash kya hai?/ jav vikas ke sidhant in hindi

हेलो दोस्तों आज हम जानेंगे जैव विकास (organic evolution)क्या है? तथा जैव विकास कि विशेषताओं के बारे में।
विकास का  शाब्दिक अर्थ होता है छिपी हुई वस्तु के बारे में समय समय पर हुए परिवर्तन को जानना ।
जीव विज्ञान(बायोलॉजी) की वह शाखा जिसमें जीव जंतुओं तथा
 उनकी पीढ़ियों में हूए कर्मिक परिवर्तनों का अध्ययन किया जाता है जैव विकास कहलाता है। जैव विकास एक धीमी गति से होने वाला क्रमिक परिवर्तन है ।

जैव विकास के सिद्धांत-(theories of evolution) -

जैव विकास कि प्रतिक्रिया को समझाने के लिए समय समय पर अनेक वैज्ञानिकों ने अपने सिद्धांत व्यक्त किए जिनमें से तीन मुख्य सिद्धांत माने जाते हैं।

1- डार्विनवाद

2- लामार्कवाद

3-उत्तपरिर्वतन वाद

डार्विनवाद (Darwinism) -

ब्रिटेन के महान वैज्ञानिक चार्ल्स रोबर्ट डार्विन ने जैव विकास के संबंध में प्राकृतिक वरण ( netural selection) का सिद्धांत दिया जिसे डार्विनवाद के नाम से जाना जाता है । डार्विन ने 20 सालों के कठीन परिश्रम के बाद साल 1859 में विकास के संबंध में अपने सिद्धांतों को "प्राकृतिक वरण द्वारा जातियों की उत्पति "(origin of species by neutral selection) नाम की एक किताब में प्रस्तुत किया था जिसे प्राकृतिक वरणवाद या डार्विन वाद ( Darwinism) के नाम से जाना जाता है।

 डार्विन वाद (Darwinism) कि विशेषतायें

1- जीवों में सन्तान उत्तपन्न करने की अधिक छमता होती है।
2-जीवों को अपने जीवन पूर्ति के लिए संघर्ष करना पड़ता है।
3-सभी जीवों में अलग अलग भिन्नताएं होती हैं।
लामार्क वाद (lamarckisim) -
डी - लामार्क फ्रांस के एक महान वैज्ञानिक थे जिन्होंने सबसे पहले सन 1809 में जैव विकास का सिद्धांत दिया जिसे लामार्क वाद (lamarckisim) के नाम से जाना जाता है।"फिलॉसफिक जूलॉजीक " नाम की पुस्तक में उन्होंने अपने सिद्धांतों को प्रस्तुत किया।

लामार्क वाद (lamarckisim)कि विशेषतायें-

1- प्रतेक जीव धारियों पर वातावरण में होने वाले परिवर्तनों का सीधा असर होता है ।
2-सभी जीव धारी अपने को वातावरण के अनुसार ढाल लेते हैं।
3- किसी अंग का कम उपयोग  या उपयोग ना होने के कारण अंग धीरे धीरे से गायब हो जाते हैं

उत्तपरिर्वतनवाद(mutation theorie)-

जीव धारियों के आनुवांशिक जीन और इस से सम्बन्धित गुणसूत्रों में होने वाले सभी प्रकार के परिवर्तनों को उत्तपरिर्वतन कहा जाता है।

उत्तपरिर्वतनवाद(mutation theorie) कि विशेषतायें-

1-उत्तपरिर्वतन निश्चित नहीं होते हैं ये किसी एक अंग में एक साथ भी हो सकते हैं और नहीं भी।
2- एक पूर्वज जाति से एक साथ कही जातियां जन्म ले सकती हैं।

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