dwinaam paddhati kiya hai ?/duinaam padhati ke niyam/द्विनाम पद्धति क्या है/तथा द्विनाम पद्धति के नियम

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  आज हम जानेंगे जीवों के नामकरण की द्विनाम पध्दति (binomial nomenclature) के बारे में तथा इसके नियमों के बारे में.
द्विनाम पध्दति (binomial nomenclature)  तथा वर्गीकी के जन्मदाता  (father of taxonomy) स्वीडन के एक महान जीव वैज्ञानिक, तथा चिकित्सक कार्ल लिनियस(carolus Linnaeus)
 को माना जाता है जिन्होने 1953 ई. में द्विनाम पध्दति कि आधुनिक व्याख्या की.

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dwinaam paddhati kiya hai ?/duinaam padhati ke niyam


   द्विनाम पध्दति   के अनुसार-

 हर जीव धारियों का नाम लैटिन भाषा के दो शब्दों  से बना हुआ है ।

1- पहला  शब्द वंस नाम (genetic name)  

2- दूसरा शब्द जाति (species name ) 

वंश तथा जाति नाम के बाद उसे वर्गीकी ( वैज्ञानिक) का नाम लिखा जाता है
जिसने सबसे पहले उस जाति को खोजा या जिसने इस जाति का सबसे पहले नाम दिया है ।
जैसे - मानव का वैज्ञानिक नाम होमो सेपियंस लिन्न है । वैसे होमो उस वंश का नाम है जिसकी एक जाति Sapiens है। तथा लिन , लिनियस शब्द का एक संछिप्त रूप है इसका मतलब यह है कि लिनियस ने सबसे पहले जाति को होमो सेपियंस नाम दिया था।
जैसे

कुछ जीव धारियों के  वैधानिक नाम इस प्रकार हैं-


1- मानव - (homo Sapiens)
2- धान - (orzya sativa)
3-गेहूं-(Triticum Aestivum)
4- आम -(mengifera indica)
5- मटर-( pisum sativum)
6- चना-(cicer Arietinum) आदि।


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