डार्विनवाद (darwinism) क्या है?/ वैज्ञानिकों द्वारा डार्विन वाद कि आलोचनाएं/Darwinwad kiya hai?

 Darwinwad kiya hai?/डार्विनवाद (darwinism) क्या है?

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Darwinwad kiya hai?


चार्ल्स रॉबर्ट डार्विन का ये सिद्धांत उनके समुद्री यात्रा के दौरान घटित तथ्यों पर आधारित है ।
उन्होंने ये यात्रा 1831 से 1836 तक दछिण अमेरिका जाने वाले एक ब्रिटेन जहाज से कि थी जिसका नाम एच.एम.एस बिगल था ।

चार्ल्स डार्विन के अनुसार -

1-जीवो में प्रजनन के द्वारा अधिक सन्तान उत्पन्न करने की क्षमता होती है।
2-प्रत्येक जीव में अधिक प्रजनन दर की तुलना में इस पृथ्वी पर जीवो के लिए आवास तथा भोजन नियत है । व जीवो में अपने  अस्तित्व के आपस में संघर्स होने लगता है।
3- अस्तित्व के लिए संघर्स  दूसरी प्रजातियों के साथ साथ प्रकृति तथा वातावरण के साथ भी हो सकता है।

4-प्रकृति के हर जीव में कुछ ना कुछ असमानताएं होती हैं जीवन के लिए वही जीव योग्य होते हैं जो सबसे ज्यादा प्रभावशाली होते हैं आरोग्य गुणों वाले जीव नस्ट हो जाते हैं।

5-जीवन के संघर्ष में सफल होने वाले जीव अधिक समय तक जीवित रहते हैं और अपने बंस को  आगे बढ़ाने में कामयाबी हासिल करते है.।
1858 में डार्विन और बैलेष ने मिलकर अपने कार्यों को पूरे रूप से प्राकृतिक चयनवाद के रुप में प्रकाशित किया ।

डार्विनवाद कि आलोचनाएं-

1- बैज्ञानिको ने  चार्ल्स डार्विन के लिंग चयनवाद को गलत ठहराया है।
2-चार्ल्स डार्विन के अनुसार नयी जीव जातियों की उत्पति।  के  लिए
बिभिन्नताऐं  जिम्मेदार थी  जबकि अन्य बैज्ञानिको के हिसाब से छोटी छोटी भिन्नता से नई जीव जातियों कि उत्पति नहीं हो सकती है ।आज भी डार्विन वाद को लेकर बैज्ञानिको में मतभेद बना हुआ है।

 उम्मीद है ये जानकारी आपको अच्छी लगी होगी 🙏



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