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Magnetic Hill ke ansuljhe rehsya/ मैगनेटिक हिल्स के अनसुलझे रहस्य

परिचय- हेल्लो दोस्तो आज हम जानेंगे magnetic Hill के अनसुलझे रहस्यों के बारे में हमारी ये पूरी दुनियां रहस्यों से भरी पड़ी है इन में से कुछ रहस्यों को सुलझा लिया गया है तथा कुछ आज भी अनसुलझे ही हैं ऐसा ही एक अनसुलझा रहस्य है Magnetic Hill का जो इंसानों के लिए चर्चा का विषय बना हुआ है।
MagneticHill ke ansuljhe rehsya- मैगनेटिक हिल्स के अनसुलझा रहस्य-

Magnetic Hill  लेह -लाद्दख के एक हाइवे पर स्तिथ है इसकी खास बात ये है कि यहां  पर कोई भी गाड़ी बंद करने के बाद भी  खड़ी चढ़ाई पर काफी तेजी से खुद चलने लगती है । गाड़ी ही नहीं बल्कि पानी को भी नीचे डालने पर विपरीत दिशा में बहने लगता है।

श्रीनगर लेह लद्दाख के इस रहस्यम हाईवे के बारे में कहीं कहानियां प्रचलित हैं- जैसे-
वहां के स्थानीय लोगों का कहना है कि इस जगह पर कही सदियों पहले स्वर्ग का रास्ता हुआ करता था।अगर आप उस रास्ते पर चलेंगे तो खुद स्वर्ग में पहुंच जाएंगे और अगर आप ने अपने जीवन में पाप किए हैं तो आप बिल्कुल भी आगे नहीं बढ़ पाएंगे।
Magnetic Hill के बारे में वैज्ञानक तथ्य-• वैज्ञानिकों का कहना है कि इस जगह पर चुंबिय हस्तक्षेप ( मैगने…

रूपकुंड झील के अनसुलझे रहस्य /roopkund jheel ke unsuljhe rehsya -

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हमारा देश में आज भी कही ऐसे अनसुलझे रहस्य हैं जिनके बारे में अभी तक कोई नहीं जान पाया है
ऐसे ही एक अनसुलझा रहस्य है रूपकुंड झील का ।
रूपकुंड झील के अनसुलझे रहस्य /roopkund jheel ke unsuljhe rehsya -  रूपकुंड झील उत्तराखंड के चमोली जिले के गोपेश्वरनाथ में स्तिथ है। बर्फीली चोटियां के बीच बसा ये इलाका प्राचीन काल से ही धार्मिक आस्थाओं का केंद्र रहा है। समुद्र तल से इसकी ऊंचाई  5000 मी0 है ।
इस झील को आम भाषा में कंकालों कि झील के नाम भी जाना जाता है ।
क्यूंकि इसके आस पास हज़ारों की संख्या में कंकाल तंत्र मिलते हैं ।
उत्तराखंड में इसके बारे में कहीं लोक कथाएं प्रचलित हैं - 1-ऐसा माना जाता है कि कैलाश जाते समय मां नंदा देवी को प्यास लगी थी उन्होंने इसके बारे में भगवान शिव को बताया भगवान शिव ने अपना त्रिशूल से उस जगह पे पानी उत्पन कर दिया था पानी पीते वक्त नंदा देवी ने उस कुंड में अपना चेहरा देखा तो उन्हें ये कुंड पसंद आ गया ।इसके बाद से ही इस कुंड को रूपकुंड के नाम से जाने जाना  लगा ।
उत्तराखंड के कहीं लोक गीतों और जागरों में भी इस रहस्य मय झील का  जिक्र किया गया है।यहा लोग नंदा देवी की …

जोन ऑफ साइलेंस' (zone of silence) के रहस्य ,जहां हर चीज काम करना बंद कर देती है.

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हेल्लो दोस्तों आज हम जानेंगे ' जोन ऑफ साइलेंस'(zone of silence) के कुछ अनसुलझे व अजीबोगरीब रहस्यों के बारे में ।
हमारी इस दुनिया में आज भी कुछ जगह ऐसी हैं
जिनका रहस्य वैज्ञानिक आज भी नहीं सुलझा पाए हैं ।

 इसमें एक नाम आता है जॉन ऑफ साइलेंस का जो स्तिथ है नोर्थ अमेरिका के मैक्सिको सिटी में।

                       Zone of silence
जोन ऑफ साइलेंस के रहस्य ( 'zone of silence'ke rehsya)- मैक्सिको में स्तिथ यह जगह बहुत ही आजीबोगरीब और बिचित्र है । इसकी खास बात यह है कि यहां आने पर सभी इलेक्ट्रॉनिक उपकरण अपना काम करना बंद कर देते हैं।
कहा जाता है कि यहां किसी भी प्रकार की रेडिओ फ्रीक्वेंसी काम नहीं करती है।
जोन ऑफ साइलेंस तब सामने आया जब सन 1938 में वहां पर उल्का पिंड गिरा था।
  जोन ऑफ साइलेंस (zone of silence) के बारे में वैज्ञानिकों का दावा - वैज्ञानकों और सोधकर्ताओं ने अपनी खोज में बताया कि वहां पर कोई भी सिग्नल काम नहीं कर सकता ।
 इस क्षेत्र के अधिक चुंभिकिय होने के कारण एक dark zone बनता है।
जो रहस्यम तरीके से इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों को बंद कर देता है।
स्थानीय लोग इसे ऎलियन…

bermuda triangle ke rahasya / बरमूडा ट्रायंगल के रहस्य

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हेल्लो दोस्तों आज हम जानेंगे Barmuda Triangale के कुछ अनसुलझे रहस्यों के बारे में।



हमारी इस दुनियां में आज भी कही ऐसे राज या रहस्य हैं जो कि अभी तक अनसुलझे हैं। इन्हीं में से एक नाम आता है barmuda triangle
अगर हम समुद्रों की बात करे तो अभी तक केवल लगभग 5% ही इसके बारे में जान पाए हैं। लगभग 95% अभी भी अज्ञात है।

Barmuda Triangle ke rehsya (बरमुडा  के रहस्य) -  Barmuda Triangle दुनियां के अनसुलझे रहस्यों में से एक है ।इसके नजदीक से आज तक जितने भी जहाज गुजरे हैं उनका कहीं पता नहीं चला है। जहाजों में सावर यात्रियों का क्या हुआ वो लोग कहां गायब हो गए ?
 ये आज भी एक रहस्य बना हुआ है।

आश्चर्यजक घटना-  5 दिसम्बर 1945 में अमेरिकन नेवी के 14 सैनिकों ने अपने लड़ाकू विमान से फ्लोरिडा से उड़ान भरी कुछ ही दूरी तय करने के बाद उनके  कम्पास ने काम करना बंद कर दिया तथा समुंद्र में भी अजीब सी हरकते होने लगी और उन सैनिकों के सामने बादलों की सुरंग दिखने लगी और तभी उनका संपर्क टूट गया उसके बाद उनका कही पता नहीं चला।
उसी दिन एक और जहाज को भेजा गया टेकआफ के 27 मिनट बाद ही उसका भी कहीं पता नहीं चला ।हर साल ब…

डेथ वेली के बारे में कुछ अनसुलझे रहस्य /death valley Kiya hai ?/ डेथ वेली क्या है ?/Death valley ke baare me kuch unsuljhe rehsya

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हेल्लो दोस्तों आज हम जानेंगे death valley  के कुछ अनसुलझे रहस्यों के बारे में।


हमारी इस पूरी दुनियां में आज भी कुछ जगह  ऐसी   है जो एक रहस्य बनी हुई हैं इन्हीं में से एक है death valley जिसे मौत की घाटी के नाम से जाना जाता है।
जो स्तिथ है अमेरिका के कैलiफोर्निया में .
दुनियां के सबसे गर्म रेगिस्तानों में एक Daeth valley  का नाम भी जोड़ा जाता है।

डेथ वेली के बारे में कुछ अनसुलझे रहस्य /Death valley ke baare me kuch unsuljhe rehsya - इस गर्म रेगिस्तान में काफी मात्रा में बड़े बड़े पत्थर मौजुद हैं । इतने विशालकाय होने के बाद भी ये पत्थर अपनी जगह निरंतर बदलते रहते हैं।

जिससे पूरे रेगिस्तान में इसके निशान देखने को मिलते  हैं।
सुरुआती दौर में अमेरिका आने वाले लोग इसी रास्ते से गुजरते थे जिसके कारण हजारों लोगों की   इस गर्म और सूखे रेगिस्तान में मौत हो जाती थी।
इसलिए इसे death valley  या मौत कि घाटी का  नाम दिया गया।

वैज्ञानिकों ने जब इस घाटी का अध्ययन किया  तो इसमें हजारों की संख्या में रहस्यमय तरीके  से इंसानों और जानवरों के कंकाल तंत्र मिले।

Death valley के पत्थरों का एक जगह से दूसरी जगह…

dwinaam paddhati kiya hai ?/duinaam padhati ke niyam/द्विनाम पद्धति क्या है/तथा द्विनाम पद्धति के नियम

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Hello Dosto🙏
  आज हम जानेंगे जीवों के नामकरण की द्विनाम पध्दति (binomial nomenclature) के बारे में तथा इसके नियमों के बारे में.
द्विनाम पध्दति (binomial nomenclature)  तथा वर्गीकी के जन्मदाता  (father of taxonomy) स्वीडन के एक महान जीव वैज्ञानिक, तथा चिकित्सक कार्ल लिनियस(carolus Linnaeus)
 को माना जाता है जिन्होने 1953 ई. में द्विनाम पध्दति कि आधुनिक व्याख्या की.


   द्विनाम पध्दति   के अनुसार-
 हर जीव धारियों का नाम लैटिन भाषा के दो शब्दों  से बना हुआ है । 1- पहला  शब्द वंस नाम (genetic name)   2- दूसरा शब्द जाति (species name )  वंश तथा जाति नाम के बाद उसे वर्गीकी ( वैज्ञानिक) का नाम लिखा जाता है
जिसने सबसे पहले उस जाति को खोजा या जिसने इस जाति का सबसे पहले नाम दिया है ।
जैसे - मानव का वैज्ञानिक नाम होमो सेपियंस लिन्न है । वैसे होमो उस वंश का नाम है जिसकी एक जाति Sapiens है। तथा लिन , लिनियस शब्द का एक संछिप्त रूप है इसका मतलब यह है कि लिनियस ने सबसे पहले जाति को होमो सेपियंस नाम दिया था।
जैसे
कुछ जीव धारियों के  वैधानिक नाम इस प्रकार हैं-
1- मानव - (homo Sapiens)
2- धान - (orzya s…

Jaiv vikash kya hai?/ jav vikas ke sidhant in hindi / जैव विकास क्या है ? / जैव विकास के सिद्धांत ?

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हेलो दोस्तों आज हम जानेंगे जैव विकास (organic evolution)क्या है? तथा जैव विकास कि विशेषताओं के बारे में।
विकास का  शाब्दिक अर्थ होता है छिपी हुई वस्तु के बारे में समय समय पर हुए परिवर्तन को जानना ।
जीव विज्ञान(बायोलॉजी) की वह शाखा जिसमें जीव जंतुओं तथा
 उनकी पीढ़ियों में हूए कर्मिक परिवर्तनों का अध्ययन किया जाता है जैव विकास कहलाता है। जैव विकास एक धीमी गति से होने वाला क्रमिक परिवर्तन है ।
जैव विकास के सिद्धांत-(theories of evolution) - जैव विकास कि प्रतिक्रिया को समझाने के लिए समय समय पर अनेक वैज्ञानिकों ने अपने सिद्धांत व्यक्त किए जिनमें से तीन मुख्य सिद्धांत माने जाते हैं।
1- डार्विनवाद 2- लामार्कवाद 3-उत्तपरिर्वतन वाद डार्विनवाद (Darwinism) - ब्रिटेन के महान वैज्ञानिक चार्ल्स रोबर्ट डार्विन ने जैव विकास के संबंध में प्राकृतिक वरण ( netural selection) का सिद्धांत दिया जिसे डार्विनवाद के नाम से जाना जाता है । डार्विन ने 20 सालों के कठीन परिश्रम के बाद साल 1859 में विकास के संबंध में अपने सिद्धांतों को "प्राकृतिक वरण द्वारा जातियों की उत्पति "(origin of species by neutral…

Lamarckism Kya hai ?/लैमार्कवाद क्या है?

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हैलो।।

 दोस्तों आज आप जानेंगे कि लैमार्कवाद क्या है ? तथा लैमार्क कौन थे?
लैमार्क फ़्रांस के एक प्रसिद्ध वैज्ञानिक थे इनका पूरा नाम. जे. बी.लैमार्क था।
उनको विकाश वाद का जन्म दाता भी कहा जाता है उन्होंने  सबसे पहले 1809 में एक पुस्तक लिखी थी जिसका नाम ,  "फिलॉसफिक जुलोजिक"  था इस पुस्तक में उन्होंने अपने जैव विकास के विचारों को लिखा था । जिसे लैमार्कवाद या वंशागति सिध्दांत के नाम से जाना जाता है।
जे. बी.लैमार्क के मुख्य सिध्दांत- लैमार्क ने बताया कि जीवों कि संरचना के व्यवहार पर वातावरण के परिवर्तन का सीधा असर पड़ता है। परिवर्तित वातावरण के कारण जीवों के अंगो का उपयोग कम या अधिक होता है तथा जिन अंगो का उपयोग नहीं होता है वो अंग धीरे धीरे समाप्त होने लग जाते हैं इससे
जीव जंतुओं  के शरीर में जो बदलाव होता है उसे उपार्जित लछण कहते हैं।
जीव जंतुओं के उपार्जित लछण वंसागत  होते हैं जो एक पीढ़ी से दूसरी पीढ़ी में प्रजनन के द्वारा प्रवेश करते हैं ऐसा बार बार होने से कुछ पीढ़ियों के बाद जीवों कि  शारीरिक   संरचना बदल जाती है और एक नयी प्रजाति का विकास हो जाता है।
लैमार्कवाद के सिध्द…

Deta intary kya hai?/डाटा एंट्री क्या है ?

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हेल्लो दोस्तो आप ने कभी ना कभी डाटा एंट्री का नाम तो जरूर सुना होगा तथा आप में से बहुत से लोग इस क्षेत्र में कार्य भी करते होगे.
आज में आपसे डाटा एंट्री के बारे में कुछ महत्व पूर्ण बाते शाझा करूंगा।
Deta intary kya hai? आसान भाषा में बात करें तो टेक्स्ट, नंबर, फाइल आदि के रूप में अनेक प्रकार के  डाटा कम्प्यूटर  प्रोग्राम में रखना डाटा एंट्री कहलाता है।
डाटा एंट्री का काम विशेश लोगों ्दवारा  किया जाता है जिनको डाटा एंट्री के बारे में अच्छा खासा ज्ञान होता है.
जब हम अपने कमप्यूटर पर कोई फाइल फोटो या फिर किसीअन्य  प्रकार के टेक्स्ट आदि को  अपलोड करते हैं तो वो भी एक प्रकार की डाटा एंट्री ही है डाटा एंट्री का कार्य मुख्य रूप से बडी बडी कम्पनी , ऑफिस आदि में किया जाता है . क्योंकि इनका काफी मात्रा में काम चलता है जिसके लिए डाटा एंट्री ऑपरेटर को जॉब पर रखना पड़ता है।
डाटा एंट्री का कार्य ऑफलाइन तथा ऑनलाइन दोनों तरीकों से किया जाता है.
डाटा एंट्री ऑपरेटर बनने के लिए महत्व पूर्ण बाते 1- आप को किसी भी भाषा का अच्छा खासा ज्ञान होना जरूरी है । 2-आपकी टाइपिंग गति काफी तेज होनी चाहिय ।
3- भाषाओं …

great barrier reef kiya hai? /ग्रेट बैरियर रीफ क्या है ?/तथा किस महासागर में स्तिथ है?

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हेल्लो दोस्तों आज हम जानेंगे ग्रेट बैरियर रिफ़   के बारे में।
ग्रेट बैरियर रिफ़ दुनिया की सबसे बड़ी मूंगे की चट्टान है जो कि ऑस्ट्रेलिया में स्थित है जिसे " पानी के बगीचे" के नाम से भी जाना जाता है। जिसकी कुल लंबाई १२०० मील तथा चौड़ाई 10से 90 मील तक कि है इसका ज्यादातर भागपानी के अंदर है लेकिन बहुत सी जगह पर पानी से बाहर भी देखने को मिल जाता है। यह दुनिया का सबसे बड़ा कोरल इको सिस्टम है जिसको 1981 में युनिस्को द्वारा विश्व विरासत स्थल के रूप में स्वीकार किया था।
इसके साथ साथ  ग्रेट बैरियर रिफ को दुनियां के सात  अजूबों में से एक माना जाता है।
ग्रेट बैरियर रीफ का जलीय वातावरण के लिए महत्व पूर्ण योगदान- ग्रेट बैरियर रिफ में विभिन्न प्रकार के समुद्री जीवो का आवास स्थान होता है -

1-दुनिया में ह्मपबैक व्हेल लगभग एक मात्र ग्रेट बैरियर रिफ में ही पाई जाती है।
2- समुद्री कछुओं की एक प्रजाति जो लगभग बिलुप्त होने के कगार पर है जिसका नाम "डुगोंग" है वो भी  ग्रेट बैरियर रिफ में आवास करती है।
3-इसके अलावा मछलियों की लगभग 1500 और सांपो कि लगभग 17 से भी अधिक प्रजातियां पाई जाती है…

वायरस क्या है ?तथा वायरस कि खोज किस ने कि थी?/virus kiya hai /virus ki khoj kisne kiya thi

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virus kiya hai /virus ki khoj kisne kiya thi /वायरस क्या है तथा वायरस कि खोज किस ने कि थी?


हेलो दोस्तो आप को मालूम होगा कि काफी बीमारियों का मुख्या कारण वायरस (बिषाणु) ही होते हैं। चाहे वो कोई भी बीमारी हो ।
हमारे शरीर को बीमार करने में बीषाणु का ही योगदान रहता है लेकिन क्या आप जानते हैं कि वाइरस की खोज किसने की तथा किसने पता लगाया कि वायरस ही बीमारियों का मुख्य  कारण है ।

वायरस शब्द लैटिन भाषा से लिया गया है जिसका अर्थ होता बिष या बिषाणु।
वायरस में बहुत छोटे छोटे रोग के कण  होते हैं जो कि किसी भी वातावरण में मिल जाते हैं। वैज्ञानिकों  द्वारा  वायरस को मृत तथा जीवित दो वर्गों में विभाजित किया गया है।
वायरस के माप में भी भिन्नताएं पाई जाती हैं जोकि हर स्तिथि में अलग अलग होती है ।
सबसे छोटा वायरस 10  मिलीमाईक्रोन ब्यास का होता है जो मानव शरीर में डायरिया रोग को जन्म देता है जिसका नाम पारवोवायरस है।
तथा सबसे बड़ा वायरस चेचक रोग का होता है जो लगभग 300 से 400 मिलीमाईक्रोन ब्यास का होता है।
वायरस के प्रमुख लछण - वायरस में  अक्सर कुछ ऐसे लछण पाए जाते हैं जो किसी अन्य जीव में नहीं होते हैं-

डार्विनवाद (darwinism) क्या है?/ वैज्ञानिकों द्वारा डार्विन वाद कि आलोचनाएं/Darwinwad kiya hai?

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Darwinwad kiya hai?/डार्विनवाद (darwinism) क्या है?
चार्ल्स रॉबर्ट डार्विन का ये सिद्धांत उनके समुद्री यात्रा के दौरान घटित तथ्यों पर आधारित है ।
उन्होंने ये यात्रा 1831 से 1836 तक दछिण अमेरिका जाने वाले एक ब्रिटेन जहाज से कि थी जिसका नाम एच.एम.एस बिगल था ।
चार्ल्स डार्विन के अनुसार - 1-जीवो में प्रजनन के द्वारा अधिक सन्तान उत्पन्न करने की क्षमता होती है।
2-प्रत्येक जीव में अधिक प्रजनन दर की तुलना में इस पृथ्वी पर जीवो के लिए आवास तथा भोजन नियत है । व जीवो में अपने  अस्तित्व के आपस में संघर्स होने लगता है।
3- अस्तित्व के लिए संघर्स  दूसरी प्रजातियों के साथ साथ प्रकृति तथा वातावरण के साथ भी हो सकता है।

4-प्रकृति के हर जीव में कुछ ना कुछ असमानताएं होती हैं जीवन के लिए वही जीव योग्य होते हैं जो सबसे ज्यादा प्रभावशाली होते हैं आरोग्य गुणों वाले जीव नस्ट हो जाते हैं।

5-जीवन के संघर्ष में सफल होने वाले जीव अधिक समय तक जीवित रहते हैं और अपने बंस को  आगे बढ़ाने में कामयाबी हासिल करते है.।
1858 में डार्विन और बैलेष ने मिलकर अपने कार्यों को पूरे रूप से प्राकृतिक चयनवाद के रुप में प्रकाशित किया…

HIV,AIDS क्या है ? /AIDS,HIV का पुरा नाम क्या है?

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HIV,AIDS क्या है ? Aids का पूरा नाम (acquired immune deficiency syndrome) है तथा एचआईवी का पूरा नाम ( Human immunodeficiency virus) है ।
एचआईवी संक्रमण के बाद की अवस्था है जिसमें इसमें इंसान अपनी रोग प्रतिरेधक क्षमता को खो देता है। एचआईवी वायरस को एड्स की अवस्था तक पहुंचने में लगभग 8से 10 साल का टाईम लगता है।एड्स दुनियां में सबसे पहले अफ्रीका के बंदरो की एक प्रजाति में पाया गया था जो धीरे धीरे पूरी दुनिया में एक महामारी के रूप में फ़ैल गया। सबसे पहले एड्स को 1981 में खोजा गया था। तब से आज तक इस बीमारी के कारण हजारों लोग अपनी जान गंवा चुके हैं।

 भारत में एड्स एक चुनौती बनी हुई है तथा भारत में एड्स का पहला मरीज 1986 में पाया गया था। तब से आज तक ये बीमारी फैलती जा रही है । विश्व एड्स दिवस  1988 के बाद से 1 दिसम्बर को हर साल मनाया जाता है जिसका मुख्य उद्देश्य लोगों को एचआईवी तथा एड्स के बारे में लोगों को जागरूक करना है ।दुनिया भर में लोग अक्सर एचआईवी एड्स कि रोकथाम और नियंत्रण पर इस दिन निरीक्षण करते हैं।

एड्स संक्रमण के मुख्य कारण- 1- असुरछित योन सम्बन्ध ,
 2- खून का आदान प्रदान,
3- मां…

"DNA क्या है?"/DNA kiya hai?

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DNA kiya hai?/ DNA(डीएनए) क्या है? आप ने कभी ना कभी डीएनए नाम तो सुना ही होगा DNA का पूरा नाम डी ऑक्सीराइबो न्यूक्लिक अम्ल है । विज्ञान के छेत्र में हर दिन अलग अलग खोजें होती हैं उन्हीं में से डीएनए का नाम भी आता है। जो इंसान के शरीर का एक प्रमुख अणु है। जिसके द्वारा इंसान के पारिवारिक और आनुवांशिक रिस्तो के बारे में पता कर पाना आसान हो जाता है। डीएनए की सबसे अधिक मात्रा बाल व त्वचा  में पाई जाती है। हमारा शरीर हज़ारों अणुऔं और कोशिकाओं से मिल कर बना होता है इन में से डीएनए भी एक अणु है जो इंसानी रिश्तों को दर्शाता है। जिसके द्वारा अपने वंस के बारे में पता लागया जा सकता है।
डीएनए (डी ऑक्सीराइबो न्यूक्लिक अम्ल ) कि खोज-जेम्स वाटसन और फ्रैकिस क्रिक ने मिलकर  1952 में डीएनए कि खोज की थी. DNA के प्रमुख कार्य- हमारे बॉडी में डीएनए के बहुत ही प्रमुख कार्य होते है जैसे -डीएनए हमारे शरीर कि आनुवांशिक का संचालन करना आदि।

इसरो क्या है?/isro kiya hai?

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isro kiya hai?/इसरो (isro)क्या है?
इसरो का पुरा नाम ( Indian space Research organization)भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन है
 जिसका मुख्यालय बैंगलोर में स्तिथ है जिसमें लगभग 70 हजार वैज्ञानिक व अन्य लोग काम करते है.इसरो का मुख्य काम भारत के लिए अंतरिक्ष सम्बन्धी कार्यों के लिए तकनीक उपल्बध क र वाना है।
इसकी स्थापना 15 अगस्त 1969 में हुई तथा इसके प्रसाशक -डॉ के. शिवान निदेशक थे़
भारत का प्रथम उपग्रह आर्यभट था जो 19 अप्रैल 1975को सोवियत संघ द्वारा अंतरिक्ष में छोडा़ गया था जिसका नाम महान गणितज्ञ आर्यभट्ट के नाम से रखा गया ।
7 जून1979 को भारत का दूसरा उपग्रह भास्कर की स्थापना की गई थी जिसका वजन 445 किलो था।




इन्द्र धनुष (Raindow) क्यों दिखाई देता है?

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इन्द्र धनुष (Raindow) क्यों दिखाई देता है?
आप ने कभी ना कभी इंद्र धनुष को देखा होगा क्या आप ने ये सोचा है ?
कि इंद्र धनुष कैसे बनता है?
इंद्रधनुष बनाने में बारिश की छोटी बूंदों का योगदान होता है
क्योंकि ये बूंदे प्रिज्म की तरह काम करती है
और एक बारिश की बूंद में दो सतह होती हैं।
सूरज की रोशनी जब बूंद के अंदर प्रेवश करती तो टकरा कर थोड़ा झुक जाती हैं जिसके कारण सूर्य के प्रकाश में सातों रंग दिखाई देते हैं।

इन्द्र धनुष  क्यों बनता है इन्द्र धनुष में दिखाई देने वाले रंग कुछ इस प्रकार हैं-बैंगनी, जामुनी,नीला, हरा, पीला,
नारंगी व लाल जिसे अंग्रेजी़ के (VIBGYOR)(violet,indigo,Blue,green, yellow,orenge )
से दर्शाया जाता है
इन्द्र धनुष अक्सर तब बनता है जब बारिश की बूंदों पर गिरने वाली सूरज की किरणों का दो बार
अपवर्तन और परावर्तन होता है ।

समुद्र का पानी खारा(नमकीन) क्यों होता है?

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समुद्र का  पानी खारा(नमकीन) क्यों  होता है?
 दुनिया में जितनी भी नदियां हैं उन सबका का पानी समुद्र में आके मिल जाता है ।
इन मेसे कुछ नदियों का पानी खारा होता है तथा कुछ का मीठा होता है
जब ये  पानी भाप बन के बादल का रूप ले लेता है और बारिश के पानी के रूप में बरस जाता है पानी बरसते समय हवा में उपस्थित नाइट्रोजन, कार्बनडाई ऑक्साइड आदि गैसों के संपर्क में आके बारिश का पानी अम्लीय हो जाता है तथा जब ये पानी जमीन, पहाड़ों से होकर गुजरता है तो इस में धूल मिट्टी आदि का टुकड़े इसमें मिल
जाते हैं।
तब ये धूल मिट्टी के कण नदी के पानी से समुद्र में आते हैं ।
जायदा तर नदियों  के पानी में नमक की मात्रा बहुत कम होती है इसलिए हमें इसका पानी खारा नहीं लगता है लेकिन जब हजा़रों नदी मिल के सागर का रूप धारण कर लेती हैं तो इसका पानी खारा , नमकीन हो जाता है।

समुद्र में उपस्थित  सोडियम और क्लोरीन का होना भी समुद्र के पानी को खारा बना देता है।

मृत सागर में खारा पानी अन्य समुद्रों की तुलना में बहुत अधिक है इस खारे पानी के कारण मृत सागर में जलीय जीव जंतु कम पाए जाते हैं।

W.H.O (World health organization) क्या है?

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W.H.0 क्या है?
क्या आप जानते हैं कि w.h.o यानी (वर्ल्ड हैल्थ ऑर्गेनाइजेशन) विश्व स्वास्थ्य संगठन क्या है और ये क्या काम करता है ।
विश्व स्वास्थ्य संगठन की स्थापना 7 अप्रैल 1948 में कि गई थी।
तथा इसका मुख्यालय स्विट्जर लैंड के जेनेवा मे है।
इसमें भारत सहित  1930 देश सामिल हैं  भारत में w.h.o का मुख्यालय नई दिल्ली में  स्थित है।

वर्ल्ड हैल्थ ऑर्गेनाइजेशन कि स्थापना क्यों हुई- वर्ल्ड हैल्थ ऑर्गेनाइजेशन का मुख्य उद्देश्य लोगों तक स्वास्थ्य सेवाएं प्रदान करना है जिससे लोगों का स्वास्थ्य बेहतर हो सके।
तथा विश्व के  औषधीय पदार्थो को विकसित तथा प्रोत्साहत करना है
विश्व स्वास्थ्य संगठन के द्वारा कैंसर , मस्तिष्क रोग जैसी गम्भीर बीमारियों के विषय आदि में भी
शोध कार्य किए जाते हैं।

Red Cross क्या है?

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Red Cross क्या है?

रेड क्रॉस एक अंतराष्ट्रीय स्तर की  स्वयं सेवी संस्था है जो आपदा , युद्ध के दौरान लोगों की निशुल्क सेवा व मदद करती है अभी तक लगभग
210 देश रेड क्रॉस संस्था से जुड़ चुके हैं।

रेड क्रॉस कि  स्थापना -
रेड क्रॉस कि स्थापना हेनरी ड्युनेट ने 9 फरवरी 1863 को स्विट्जरलैंड के जेनेवा में में पांच लोगों को मिला कर बनाई गई थी। तब से आज तक 8 मई को विश्व रेड क्रॉस दिवस मनाया जाता है ।
8 मई को हेनरी ड्युनेट यानी रेड क्रॉस के स्थांपक 
का जन्म दिन था।
भारत में रेड क्रॉस संस्था का गठन- भारत में साल  1920 में रेड क्रॉस संस्था की स्थापना हुई ।
तब से आज तक रेड क्रॉस संगठन के लोग नी स्वार्थ भाव से अपनी सेवाएं प्रदान कर रहे हैं।

पत्तियों का रंग हरा क्यों होता है?/Patiyo ka rang hara kyu hota/

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Patiyo ka rang hara kyu hota hai?/पत्तियों का रंग हरा क्यों होता है?

आप ने कभी ध्यान दिया होगा कि आखिर पेड़ पौधे की पत्तयों का रंग हरा ही क्यों होता है, कोई और क्यों नहीं।
दरसअल पेड़ पौधे भोजन प्राप्त करने के लिए सूर्य के प्रकाश पर निर्भर रहते हैं।
पौधे कि पत्तयों छोटे छोटे वर्णक होते हैं जिन्हें पर्णहरिम या क्लोरोफिल कहते हैं।

तथा पत्तो  में क्लोरोफिल की मात्रा भरपूर रूप से पायी जाती है जिसके कारण पत्तियो  का रंग हरा हो जाता है। व पर्ण हरिम और सूर्य का प्रकाश जब आपस में मिलते हैं तो पेड़ पौधों को भोजन कि प्राप्ति होती है इस क्रिया को photosynthesis(प्रकाश संश्लेषण) कहा जाता है।

Corona virus क्या है??

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कोरोना वायरस क्या है?
हाल ही में दुनिया में एक चोकाने वाली बीमारी फैली है जिसका नाम Corona virus  है।
ये बीमारी सबसे पहले चीन में फैली चीन के साथ साथ दुनिया के कही देशों में इसके लछण देखने को मिल रहे हैं। इस के बारे मे अभी तक कोई ठोस कारण पता नहीं चल पाया है लेकिन कुछ रिपोर्ट की माने तो ये बीमारी चीन के गुहान सहर से फैली है एक आकलन के अनुसार ये वायरस नॉनवेज खाने वाले लोगो के सरिर तक पहुंच गया। कुछ रिसर्च से पता चला है कि ये वायरस सांपो के द्वारा इंसानों तक पहुंचा है।

पिछले दिनों world health organization(w.H.O) द्वारा सूचित किया गया था कि ये एक संक्रामक वायरस है जो कि चमगादड़ आदि जंगली जानवरों के द्वारा इंसानों तक पहुंचा है।
Corona वायरस की अभी तक . जापान, बियतनाम,नेपाल , ताइवान , दछिण कोरिया , अमेरिका, और फ्रांस आदि देशों में पुष्टि हो गई है। और धीरे धीरे भारत में भी इसके संकेत दिख रहे हैं।

कोरोना वायरस के लछण- 
कोरोना वायरस के संकेत आम होते हैं जैसे ,
१-नाक से पानी का निकलना,
२- शिर दर्द होना,
३- ओंठो का रूखापन,
४- बैचैनी होना व जी मचलना,


कोरोना वायरस कैसे फैलता है -  १-खुले में खां…

आसमान का रंग नीला क्यों होता है?/aakash ka rang neela kyu dikhai deta hai?

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aakash ka rang neela kyu dikhai deta hai/ आसमान का रंग नीला क्यों होता है?


वैसे नीला रंग आसमान का अपना रंग नहीं होता है ।
क्या आप ने कभी ये सोचा है कि  आसमान नीले रंग का क्यों होता है ?
जिन लोगों ने विज्ञान को पढा होगा सिर्फ उनको मालूम होगा लेकिन आज भी बहुत से लोग नहीं जानते हैं कि आसमान नीला क्यों है।

विज्ञान के अनुसार आसमान के नीले होने के पीछे प्रकाश की किरणों का योगदान होता है जैसे कि सूर्य के प्रकाश में सात रंग होते हैं जैसे बैंगनी , नीला, हरा,पीला, नारंगी ,लाल आदि।
जब सूर्य का प्रकाश किसी रंग से टकराता है तो रंग के पार हो जाता है या उस रंग को बिखेर देता है।
इसमें कुछ रंग कम बिखरते हैं क्योंकि इन रंगों की तरंगदैर्ध बाकी रंगो से काफी़ लंबी होती है।
इसलिए सूरज का लाल प्रकाश धरती तक पहुंच जाता है जबकि नीला रंग वायुमंडल तक ही आ पाता है इसी नीले रंग के कारण आसमान नीला दिखता है।

आसमान का रंग केवल धरती से ही नीला दिखाई देता है
अगर आसमान को अंतरिक्ष से देखा जाए तो ये बिल्कुल काला दिखाई पड़ता है.